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लालू प्रसाद यादव का जीवन परिचय। Lalu Prasad Yadav Biography in Hindi।

लालू प्रसाद यादव का जीवन परिचय। Lalu Prasad Yadav Biography in Hindi।



लालू यादव की तबीयत बेहद बिगड़ गई है।


देर रात उन्हें पटना से दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। यहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। तेजस्वी यादव ने बताया, 'उनका पूरा चेकअप किया जाएगा। उसके बाद इलाज शुरू होगा। फिलहाल बॉडी में मूवमेंट नहीं हो पा रहा है।'


तेजस्वी ने बताया कि गिरने से लालूजी को तीन फ्रैक्चर हुए थे। इसके बाद उनकी स्थिति बिगड़ गई। उधर, लालू के लिए दुआओं का दौर भी जारी है। पटना के मंदिर और मस्जिदों में दुआ की गई। छोटे बच्चों ने भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।


लालू प्रसाद यादव का जीवन परिचय। Lalu Prasad Yadav Biography in Hindi।


लालू प्रसाद यादव  एक भारतीय राजनेता हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर भारतीय राजनीति में अपनी एक पहचान बनाई है. लालू ने कई सारे अहम पदों पर कार्य भी किया हुआ है और इनकी पार्टी का नाम राष्ट्रीय जनता दल है और ये इस पार्टी के अध्यक्ष और फाउंडर भी हैं. साथ ही ये बिहार के पूर्व चीफ मिनिस्टर, पूर्व रेलवे मंत्री और लोकसभा के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं. लालू प्रसाद यादव के अलावा इनकी पत्नी और बच्चे भी राजनीति से जुड़े हुए हैं. इनकी पत्नी भी बिहार की सीएम रह चुकी हैं और इनके दोनों बेटे भी बिहार के मंत्री रह चुके हैं. लालू के परिवार का नाम राजनीति के साथ भ्रष्टाचार से भी जुड़ा हुआ है और इस वक्त इनके परिवार के अधिकतर सदस्यों पर कई भ्रष्टाचार के केस चल रहे हैं.



Lalu Prasad Yadav Birth and Family

सन् 1948 में पैदा हुए लालू प्रसाद यादव का नाता बिहार स्टेट के फुलवारिया गांव से है और इसी गांव में इनका शुरूआती जीवन बिता हुआ है.

लालू के पिता कुंदन राय बेहद ही गरीब हुआ करते थे और वो एक किसान थे. इनकी मां का नाम मराचिया देवी है और वो एक गृहणी हुआ करती थी. लालू अपने माता पिता की कुल छह संतानों में से दूसरी नंबर की संतान है.

लालू प्रसाद यादव सन् 1973 में राबड़ी देवी के साथ विवाह के बंधन में बंधे थे और इस विवाह से इन दोनों को कुल 9 बच्चे हुए थे, जिनमें से इनके सात बेटियां और दो बेटे हैं.


राबड़ी देवी एक भारतीय राजनेता हैं जो कि काफी समय तक अपने राज्य यानी बिहार की सीएम रह चुकी हैं. राबड़ी देवी का नाता भी काफी गरीब परिवार से हुआ करता था और लालू की वजह से ही ये सीएम बन पाने में कामयाब हुई थी.


लालू यादव के बच्चे भी राजनीति से जुड़े हुए हैं और इनके दोनों बेटे अपनी पार्टी का कार्य संभाल रहे हैं.


इनकी सबसे बड़ी बेटी जिनका नाम मीसा है वो अपर हाउस की सदस्य हैं, जबकि इनकी अन्य बेटियों के विवाह राजनीतिक घरों से ताल्लुक रखने वाले परिवारों में हुए हैं.

लालू प्रसाद यादव की निजी जानकारी (Personal Information)

लालू यादव का जन्म किस दिन हुआ था इसके बारे में किसी को भी सही से जानकारी नहीं हैं. यहां तक की लालू यादव को भी स्वयं अपनी जन्म तारीख ज्ञात नहीं है. हालांकि अपने दस्तावेजों में ये अपने जन्म तारीख 11 जून लिखते हैं.

लालू यादव को शिक्षा हासिल करने में और पहली नौकरी दिलवाने में इनके बड़े भाई ने इनकी मदद की थी. कहा जाता है कि लालू के भाई पटना में रहते थे और जैसे ही लालू ने अपना स्कूल पास कर लिया था, तो इनके भाई इनको अपने साथ पटना लेकर आ गए थे.

मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मिसा) की मांग को लेकर ही इमरजेंसी के दौरान लालू को जेल हुई थी और इन्होंने इसी अधिनियम के ऊपर अपनी बड़ी पुत्री का नाम रखा हुआ है.

इतने बड़े राजनेता होने के बावजूद भी लालू के दोनों बेटे पढ़े लिखे हुए नहीं है और इनके दोनों बेटों ने बीच में ही अपना स्कूल छोड़ दिया था.


लालू प्रसाद यादव की शिक्षा (Education)

एक किसान परिवार में जन्मे लालू के लिए शिक्षा हासिल करना किसी कठिन काम से कम नहीं था. दरअसल जिस गांव में इनका जन्म हुआ था, वहां पर उस समय लोग शिक्षा को लेकर इतने जागरूक नहीं हुआ करते थे. साथ ही लालू के माता पिता के हालात भी इतने अच्छे नहीं थे, कि वो अपने सभी बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें. लेकिन लालू की पढ़ाई में काफी रुचि हुआ करती थी और इस रुचि के कारण वो एक शिक्षित व्यक्ति बन सके.

लालू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के ही स्कूल से हासिल की हुई है, जबकि उच्च हासिल करने के लिए ये अपने बड़े भाई के साथ पटना जाकर रहने लगे थे.

पटना में जाकर इन्होंने, यहां के बी एन विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया और यहां से इन्होंने बैचलर ऑफ लॉ और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की थी.

अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद लालू पटना के बिहार वेटरनरी कॉलेज से अपने करियर की शुरुआत की थी और इस कॉलेज में इन्हें बतौर एक क्लर्क के रुप में कार्य किया था. इसी कॉलेज में लालू के बड़े भाई भी कार्य किया करते थे और वो एक चपरासी हुआ करते थे.


Political Career)

इंडियन पॉलिटिक्स में कदम रखने से पहले लालू प्रसाद यादव ने अपने कॉलेज में होने वाले कई सारे छात्र चुनावों को लड़ा था और जीता भी था. इन चुनावों को लड़ने के कारण ही लालू को देश की राजनीति में कदम रखने में मदद मिली थी.

साल 1970 में लालू ने पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पीयूएसयू) के महासचिव बनने की लिए चुनाव लड़ा था और इस चुनाव को जीता भी था. इस चुनाव के तीन साल बाद, लालू ने पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पीयूएसयू) के अध्यक्ष के लिए भी चुनाव लड़ा था और ये चुनाव भी लालू ने जीत लिया था.

साल 1974 में जय प्रकाश नारायण द्वारा स्टार्ट किए गए ‘बिहार आंदोलन’ में लालू ने हिस्सा लिया था और इसी दौरान लालू को कई भारतीय राजनेताओं से मिलने का मौका मिला.

‘बिहार आंदोलन की मदद से ही लालू जनता पार्टी में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो सके थे और इस पार्टी के साथ जुड़कर ही इन्होंने अपना राजनीति का सफर शुरू किया था.

लालू प्रसाद यादव का राजनेता बनने का सफर (Political Career)

साल 1977 में पहली बार लड़ा चुनाव

जनता पार्टी की ओर से लालू को छपरा जिले से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला था और इस चुनाव को लालू ने बेहद ही आसानी से जीत भी लिया था. 6 वीं लोकसभा के लिए साल 1977 में हुए इस चुनाव को लालू ने महज 29 वर्ष की आयु में जीता था और कम आयु में ही लोकसभा का सदस्य बन गए थे. साल 1979 में जनता पार्टी सरकार किन्ही कारणों के चलते गिर गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद यादव ने इस पार्टी को छोड़ दिया था. 

जनता दल पार्टी को किया ज्वाइन

जनता पार्टी को छोड़ने के बाद लालू प्रसाद यादव  जनता दल  में शामिल हो गए और इस पार्टी में शामिल होने के बाद लालू ने बिहार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा था.

बिहार असेंबली के लिए लालू ने इस पार्टी की ओर से साल 1980 में पहली बार चुनाव लड़ा था और इस चुनाव को जीत भी लिया था. इस दौरान लालू यादव को बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाने का मौका भी मिला था.

साल 1990 में पहली बार बने मुख्यमंत्री

साल 1990 में लालू पहली बार बिहार स्टेट के मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे और वो इस पद पर साल 1997 तक बने रहे थे. इसी दौरान किन्ही कारणों के चलते इन्हें अपनी ये पोस्ट छोड़नी पड़ी थी.जिसके बाद इन्होंने बिहार के सीएम की पोस्ट अपनी पत्नी को सौंप दी. भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक चारा घोटले में लालू की भूमिका को लेकर सीबीआई द्वारा कई तरह की जांच की गई और बाद में इन्हें इस घोटाले के चलते गिरफ्तार भी कर लिया गया था. लालू के गिरफ्तार होने के बाद उनकी पार्टी ने उन्हें पार्टी से अलग कर दिया था.

बनाई अपनी खुद की पार्टी

जनता दल पार्टी से रास्ता अलग होने के बाद, लालू ने खुद की एक पार्टी बनाई. सन् 1977 में बनाई गई इस पार्टी का नाम इन्होंने राष्ट्रीय जनता दल रखा. काफी कम टाइम के अंदर ही इस पार्टी ने अपनी जगह बिहार के लोगों के दिलों में बना ली थी. साल 1998 में 12 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में लालू ने मधुपुरा सीट से चुनाव लड़ा था और इस सीट से ये चुनाव जीत भी लिया था. ये चुनाव जीतते ही लालू तीसरी बार लोकसभा के सदस्य बनने में कामयाब हुए थे.

लोकसभा चुनावों में लालू की पार्टी का अच्छा प्रदर्शन होने के चलते, इन्हें धीरे धीरे केंद्रीय राजनीति में भी पहचान मिलने लगी थी. लोकसभा का सदस्य बनने के दौरान लालू को लोकसभा द्वारा गठित की गई गृह मामलों की समिति, सामान्य उद्देश्य पर समिति, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सलाहकार समिति का सदस्य भी बनाया गया था.

साल 2002 में बने राज्यसभा के सदस्य

साल 2002 में लालू यादव को राज्यसभा के चुनाव सभा में का सदस्य बनाने के लिए नॉमिनेट किया गया था और ये साल 2004 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे चुके हैं.

लालू की पार्टी ने साल 2002 में बिहार में हुए असेंबली चुनाव में विजय हासिल की थी और इन्होंने फिर से अपनी पत्नी को इस राज्य का सीएम बना दिया था. हालांकि साल 2005 तक ही लालू की पत्नी इस पद पर बनी रही थी और कन्हीं कारणों के चलते इन्हें अपना ये पद छोड़ना पड़ा था.

साल 2004 में बने रेलवे मंत्री

साल 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में लालू ने बिहार की दो सीटों से चुनाव लड़ा था और इन दोनों सीटों पर उन्हें जीत मिली थी. इन चुनावों में लालू की पार्टी ने कुल 21 सीटें जीती थी.

लोकसभा में लालू की पार्टी को मिली जीत के बाद इन्होंने, कांग्रेस पार्टी को अपना समर्थन दिया था और इस तरह से ये यूपीए में शामिल हो गए थे.

यूपीए पार्टी को समर्थन देने के चलते साल 2004 में लालू को कांग्रेस पार्टी द्वारा रेलवे मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. इस मंत्रालय को लालू ने काफी अच्छे से चलाया था और भारतीय रेलवे को नुकसान से बाहर निकालने के लिए कई सारे कार्य भी किए थे.

लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से रेलवे मंत्रालय को संभाला था, उसकी तारीफ हर किसी के द्वारा की गई थी.

चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध

साल 2013 में चारा स्कैम में लालू को कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि किया गया, जिसके कारण लालू अगले आने वाले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इस प्रतिबंध के कारण लालू साल 2013 से अभी तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाए हैं.

साल 2015 में बिहार असेंबली के लिए हुए इलेक्शन को लालू के परिवार के सदस्यों द्वारा लड़ा गया और इन चुनावों में लालू और उनकी अलायन्स को जीत भी हासिल हुई.

इस वक्त लालू अपने अपराधों की सजा जेल में काट रहे हैं और उनकी पार्टी का कार्य उनके बेटों द्वारा संभाला जा रहा है.


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