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What is Agneepath Scheme | सेना भर्ती 2022| क्या है अग्निपथ योजना। क्यों हो रहा है इस योजना का विरोध

 What is Agneepath Scheme | सेना भर्ती 2022| क्या है अग्निपथ योजना। क्यों हो रहा है इस योजना का विरोध



अग्निपथ योजना क्या है?
इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में सैनिकों की 4 साल के लिए भर्ती होगी। आर्मी में सैनिक (जवान), नेवी में नाविक और एयरफोर्स में एयरमैन की जो भर्ती है, वो भर्तियां अब इस योजना के तहत होंगी। जो सैनिक भर्ती होंगे, उन्हें अग्निवीर नाम दिया जाएगा। 4 साल के बाद 75 फीसदी सैनिकों को घर भेज दिया जाएगा। शेष 25 फीसदी अग्निवीरों को स्थायी जवान नियुक्त किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया तय की जाएगी जिसमें ‘अग्निवीर‘ स्थायी होने के लिए आवेदन देंगे।



अग्निपथ योजना से किनकी भर्ती होगी? किनके लिए है यह योजना?
अग्निपथ योजना सिर्फ जवानों के लिए है। यह योजना अफसरों पर लागू नहीं होगी। सेवा अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए यह योजना होगी। नई योजना मौजूदा जवानों की खुली भर्ती की जगह ही लाई गई है। अभी जनरल ड्यूटी के अलावा, क्लर्क, स्टोर कीपर, ट्रेडमैन, नर्सिंग असिस्टेंट जैसे पदों के लिए खुली भर्ती होती है। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में वर्तमान में जवानों की जो भर्ती प्रक्रिया है, वो नहीं बदलेगी। यानी अग्निवीरों का चयन मौजूदा चयन प्रक्रिया से ही होगा। सेनाओं में अभी शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए 10 साल के लिए अफसरों की नियुक्ति होती है जिसे 14 साल तक बढ़ाया जाता है। इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या होगी योग्यता
- आयु सीमा - 17.5 वर्ष से 21 वर्ष वालों को मौका मिलेगा। 
- आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में सैनिक स्तर की भर्ती के नियम पुराने वाले ही रहेंगे। जैसे जनरल ड्यूटी (जीडी) सैनिक की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10वीं पास ही रहेगी। अलग-अलग श्रेणियों में 10वीं-12वीं पास युवाओं को मौका मिलेगा।

कब, कहां और कैसे निकलेंगी भर्तियां और कैसे कर सकेंगे आवेदन 
अगले 90 दिनों में अग्निपथ योजना के तहत 46 हजार भर्तियां निकाली जाएंगी। आर्मी में 40 हजार, एयरफोर्स में 3500 और नेवी में 2500 भर्तियां होंगी। देशव्यापी भर्ती प्रक्रिया के जरिये योग्यता के आधार पर अग्निवीरों की भर्ती होगी।


जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- ऑल इंडिया ऑल क्लास बेस्ड भर्ती होगी। 
- भर्ती रैलियों के तहत भी भर्ती रहेंगी। 
- एनरोलमेंट के लिए एक ऑनलाइन सेंट्रलाइज्ड सिस्टम विकसित किया जाएगा। 
- मान्यता प्राप्त टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स से कैंपस इंटरव्यू के लिए जरिए भी भर्तियां होंगी।

क्या होगी अग्निवीरों की सैलरी? 
हर अग्निवीर को भर्ती के पहले साल 30 हजार महीने सैलरी मिलेगी। दूसरे साल अग्निवीर की तनख्वाह बढ़कर 33 हजार, तीसरे साल 36.5 हजार तो चौथे साल 40 हजार रुपये हो जाएगी। हालांकि इनकी सैलरी में से सेवानिधि पैकेज के लिए हर बार 30-30 फीसदी कटेगा। जैसे पहले साल में 30 हजार रुपये मिलने हैं। लेकिन इसमें से 21 हजार रुपये ही उसे दिए जाएंगे। बाकी 30 फीसदी यानी 9 हजार रुपये अग्निवीर कॉर्प्स फंड में जमा होंगे। इस फंड में इतनी ही राशि (9 हजार रुपये) सरकार भी डालेगी।

पेंशन नहीं मिलेगी। सेवा निधि पैकेज मिलेगा। इस फंड के लिए अग्निवीरों की मासिक सैलरी का 30 फीसदी काटा जाएगा। इतनी ही रकम सरकार जमा करेगी। 4 साल बाद सेना से ड्यूटी मुक्त होने वाले 75 फीसदी ऐसे अग्निवीरों को 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा उनको मिले कौशल प्रमाणपत्र और बैंक लोन के जरिये उन्हें दूसरी नौकरी शुरू करने में मदद की जाएगी।

क्या कहते हैं युवा अभ्यर्थी?
 बिहार के जहानाबाद और छपरा समेत कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है, 'सेना में जाने के लिए हम जीतोड़ मेहनत करते हैं. ट्रेनिंग और छुट्टियों को मिला दें तो कोई सर्विस सिर्फ़ चार साल की कैसे हो सकती है? सिर्फ़ तीन साल की ट्रेनिंग लेकर हम देश की रक्षा कैसे करेंगे? सरकार को यह योजना वापस लेनी ही पड़ेगी?'



प्रदर्शन कर रहे युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है कि सिर्फ़ चार साल के लिए ही क्यों भर्ती की जा रही है. सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत भी कम से कम 10 से 12 साल की सर्विस होती है और आंतरिक भर्तियों में उन सैनिकों को मौका भी मिल जाता है. 'अग्निपथ योजना' में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यही है कि चार साल के बाद 75 पर्सेंट युवाओं को बाहर का रास्ता देखना ही पड़ेगा.

चार साल की सेवा के बाद 75 पर्सेंट युवाओं को रिटायर करने का कॉन्सेप्ट किसी के गले नहीं उतर रहा है. आर्मी से रिटायर और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस पर सवाल उठाए हैं. युवाओं की चिंता है कि चार साल के बाद वे क्या करेंगे. अभ्यर्थियों का कहना है कि साढ़े 17 साल में 'अग्निवीर' बनने वाले युवा के पास न तो कोई प्रोफेशनल डिग्री होगी और न ही कोई विशेष योग्यता, ऐसे में वह दोयम दर्जे की नौकरियों के लिए बाध्य होगा.

सरकार का तर्क है कि अर्धसैनिक बलों के अलावा राज्यों की नौकरियों में भी 'अग्निवीरों' को प्राथमिकता दी जाएगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ-साथ कई राज्यों ने इसके बारे में ऐलान भी कर दिया है लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि ये ऐसा होगा कि चार साल की नौकरी के बाद हम फिर से नौकरी की लाइन में लगे होंगे.

क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
 अग्निपथ योजना के खिलाफ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों की मांग बेहद स्पष्ट है. उनका कहना है कि इस योजना को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए. लंबे समय से सेनाओं में भर्ती ने होने की वजह से परेशान छात्रों की मांग है कि जल्द से जल्द भर्ती की रैलियां आयोजित कराई जाएं और परीक्षाएं शुरू हों. इसके अलावा, पुरानी लटकी भर्तियों को भी जल्द से जल्द क्लियर करने की मांग की जा रही है.

एक छात्र ने कहा कि सेनाओं में भर्ती के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाए जो पहले अपनाई जाती थी. प्रदर्शनकारियों ने कहा, 'टूर ऑफ ड्यूटी जैसी योजनाओं को वापस लेना ही होगा, वरना चार साल तक कोई भी सेना की नौकरी करने नहीं जाएगा.' प्रदर्शनकारी आर-पार के मूड में हैं और उनका प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है.

बिहार के मुंगेर, जहानाबाद, छपरा और तमाम जिलों में प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बुलंदशहर और बरेली में भी प्रदर्शन शुरू हो गया है. इसके अलावा, राजस्थान और हरियाणा के भी प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए हैं.


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