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Home Loan kya Hai होम लोन क्या है, Home Loan on Low Interest rates

Home Loan kya Hai होम लोन क्या है, Home Loan on Low Interest rates


 Home Loan कई प्रकार के होते हैं, और कई तरह के होम लोन को लेने की शर्तें भी अलग-अलग होती हैं। इस तरह ही होम लोन पर लागू ब्याज दरें भी कई तरह की होती हैं। 

सभी के अपने फायदे और नुकसान हैं। इस पोस्ट में हम आपको बताएंगें कि

1. Home Loan kya Hai

2. Home Loan Kaise Milega(होम लोन कैसे ले सकते हैं)

3. Home Loan on Low Interest rates (कम इंटरेस्ट रेट पर लोन कैसे मिलेगा)


लगभग सभी बैंक और कई हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (hfc) घर/ फ्लैट/ जमीन खरीदने के लिए Home Loan प्रदान करती हैं। वर्तमान में, होम लोन की ब्याज दर 6.40% प्रति वर्ष से शुरू होती है। आवेदक के क्रेडिट स्कोर, मासिक आय, लोन राशि, लोन टू वैल्यू (LTV) रेश्यो, जॉब प्रोफ़ाइल, नियोक्ता/ कंपनी की प्रोफ़ाइल आदि के आधार पर 30 वर्षों तक की अवधि के लिए होम लोन दिया जाता है।


सबसे कम ब्याज दरों पर होम लोन

होम लोन की ब्याज दरें इस बात पर निर्भर करती हैं कि बैंक/ लोन संस्थान को क्रेडिट स्कोर, उम्र और भुगतान क्षमता के आधार पर आवेदक को लोन देने में कितना जोखिम उठाना पड़ता है।


 Home Loan Types( होम लोन के प्रकार 


Bank/ loan संस्थान अलग- अलग उद्देश्यों के लिए होम लोन प्रदान करते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले, ये पता लगायें कि आपको अपनी किस ज़रूरत के लिए लोन चाहिए।

होम परचेज लोन(home purchase loan)

यह रेडी-टू-मूव-इन प्रॉपर्टी, अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी और प्री-ओन्ड होम/रीसेल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लिया जाने वाला सबसे आम होम लोन है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के मुताबिक, बैंक/ लोन संस्थान प्रॉपर्टी वैल्यू के 75-90% तक जितनी होम लोन राशि ऑफर कर सकते हैं।


कंपोज़िट लोन(composite loan)

यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो या तो निवेश के लिए या फिर घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदना चाहते हैं। इस प्रकार के होम लोन में, प्लॉट खरीदने के लिए लोन राशि की पहली किस्त ट्रांसफर की जाती है। फिर जैसे-जैसे घर बनकर तैयार होता रहता है वैसे-वैसे लोन की राशि आपको मिलती रहती है।


होम कंस्ट्र्क्शन लोन( Home Construction Loan)


इस प्रकार का होम लोन उन आदमियो के लिए है जिन्हें घर के निर्माण के लिए पैसे चाहिए होते हैं। यह लोन तभी दिया जाता है जब आपके पास पहले से ही ज़मीन होती है और उस पर घर बनाना चाहते हैं। कंपोज़िट लोन की तरह इसके तहत भी घर निर्माण के चरणों के मुताबिक होम लोन राशि ट्रांसफर की जाती है।


ब्रिज लोन: यह होम लोन कम अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो मौज़ूदा घर को बेचना चाहते हैं और उससे प्राप्त राशि से नया घर खरीदना चाहते हैं। बेचने और खरीदने के बीच राशि में जो अंतर होता है उसके लिए आप ब्रिज लोन ले सकते हैं।

इंटरेस्ट सेवर लोन:  यह होम लोन ओवरड्राफ्ट सुविधा के समान है। इसमें उधारकर्ता का होम लोन अकाउंट उसके बैंक अकाउंट से जुड़ा होता है। बैंक अकाउंट में ईएमआई राशि से अधिक जमा की गई किसी भी राशि का उपयोग लोन की प्रीपेमेंट के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, ब्याज राशि पर भी बचत होती है।

स्टेप अप लोन: इसके तहत उधारकर्ता लोन अवधि के शुरुआती सालों में कम ईएमआई का भुगतान करते हैं। हालांकि, समय के साथ ईएमआई राशि बढ़ती जाती है। यह उन युवा प्रोफेशनल के लिए लोन को किफायती बनाता है जिन्होंने हाल ही में अपना करियर शुरू किया है।


Home Loan: Fees and Charges

होम लोन आवेदक (Home Loan Applicant) लोन लेते समय केवल ब्याज दरों पर ध्यान देते हैं और अन्य फीस व शुल्क को नजरअंदाज़ करते हैं, जबकि ये Home Loan: Fees and Charges की लागत को काफी प्रभावित कर सकते हैं और इसलिए ऑफ़र पर निर्णय लेते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए। नीचे कुछ फीस व शुल्क की जानकारी दी गई है जो आपके होम लोन पर लागू हो सकती हैं। 


एप्लीकेशन फीस को बैंक/ loan संस्थान वेरिफिकेशन संबंधी सभी प्रारंभिक खर्चों को कवर करने के लिए वसूलते हैं।

प्रोसेसिंग फीस क्रेडिट मूल्यांकन पर किए गए खर्च को पूरा करने के लिए वसूली जाती है। ये लोन लेने वाले लोगो की क्रेडिट प्रोफाइल, आय और होम लोन home loan योजना (Home Loan Schemes) पर निर्भर करती है। हालांकि, सभी बैंक/ लोन संस्थान प्रोसेसिंग फीस नहीं लेते हैं।

एडमिनिस्ट्रेटिव फीस – यह उन बैंक/ लोन संस्थानों द्वारा वसूली जाती है जो प्रोसेसिंग फीस को एक साथ न लेकर दो हिस्सों में लेते हैं। लोन आवेदन की मंज़ूरी के बाद जो फीस ली जाती है, वह एडमिनिस्ट्रेटिव फीस होती है। सिटीबैंक उन बैंक/ लोन संस्थानों में शामिल है जो यह फीस वसूलता है।

फोरक्लोज़र/ प्रीपेमेंट फीस तब लागू होती है जब कोई उधारकर्ता लोन अवधि खत्म होने से पहले या तो पूरी लोन राशि का या उसके कुछ हिस्से का भुगतान करता है। इससे पहले, बैंक/ लोन संस्थान सभी प्रकार के होम लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी और फोरक्लोज़र शुल्क लेते थे। लेकिन आरबीआई ने बैंक/ लोन संस्थानों पर फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी लेने पर रोक लगा दी थी। जहां तक फिक्स्ड-रेट होम लोन का सवाल है, कुछ बैंक/ लोन संस्थान ये शुल्क वसूलते हैं।

भुगतान प्रकार को बदलने पर लगने वाला शुल्क: यह शुल्क तब लगाया जाता है जब लोन लेने वाले व्यक्ति लोन अवधि के दौरान, अपने मौज़ूदा भुगतान के तरीके को बदलने का निवेदन करते हैं। यह शुल्क आमतौर पर 500 रु. तक होता है। यह विभिन्न बैंक/ लोन संस्थानों में अलग-अलग होता है।

ब्याज दर को कम करने या बदलने पर शुल्क: यह शुल्क तब लगाया जाता है जब आप अपने बैंक/ लोन संस्थान से अपनी मौजूदा ब्याज दरों को बदलने या कम करने का अनुरोध करते हैं। अलग- अलग बैंकों और लोन संस्थानों में यह फीस अलग-अलग होती है और आमतौर पर बकाया मूल राशि की 2% तक होती है।

CERSAI शुल्क: CERSAI (सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइज़ेशन एसेट रिकंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट) भारत की सेंट्रल ऑनलाइन सिक्योरिटी इंटरेस्ट रजिस्ट्री है। बैंक/ लोन संस्थान CERSAI की वेबसाइट पर जाकर गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी को चेक करते हैं कि किसी अन्य बैंक द्वारा प्रॉपर्टी पर क्लेम तो नहीं किया गया है। इस प्रक्रिया के लिए बैंक एक मामूली फीस का भुगतान करते हैं, जिसे वे बाद में उधारकर्ता से वसूलते हैं।

EMI पर अतिरिक्त शुल्क: जब लोन लेने वाला व्यक्ति EMI का भुगतान नहीं कर पाता है या EMI का भुगतान देरी से करता है, तो बकाया EMI पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। इसलिए आवेदकों को समय पर EMI का भुगतान करना चाहिए।

EMI बाउंस फीस: जब आप अपने बैंक अकाउंट में अपर्याप्त धनराशि के कारण समय पर लोन भुगतान करने में विफल रहते हैं तो EMI बाउंस फीस वसूली जाती है। बाउंस होने पर बैंक आमतौर पर 500 रु. फीस लेते है। यह फीस विभिन्न बैंकों में अलग-अलग होती है।

लीगल फीस: यह फीस सामान्य तौर पर प्रोसेसिंग फीस में शामिल होती है। लेकिन जब कुछ Bank/ loan संस्थान उधारकर्ताओं के कानूनी दस्तावेजों की जांच के लिए लीगल फर्म की मदद लेते हैं तो इसे अलग से वसूला जाता है।

फ्रैंकिंग फीस: इसे आमतौर पर स्टांप फीस के नाम से भी जाता है। जब भी कोई संपत्ति खरीदी या बेची जाती है, तो राज्य सरकार एक टैक्स लेती है। यह राशि हर राज्य में अलग- अलग होती है, और राज्य के कानूनों और प्रॉपर्टी किस प्रकार की है, इस पर निर्भर करती है।


Home Loan: योग्यता शर्तें (Home Loan: Eligibility Conditions)


होम लोन की योग्यता(Eligibility)शर्तें bank/ लोन संस्थान और लोन योजनाओं के मुताबिक अलग- अलग होती हैं। हालाँकि, कुछ सामान्य होम लोन योग्यता शर्तें इस प्रकार है।

राष्ट्रीयता: आवेदक भारतीय निवासी, अनिवासी भारतीय (NRI) और भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO) होना चाहिए

क्रेडिट स्कोर: 750 या उससे अधिक

आयु सीमा: 18 – 70 वर्ष

कार्य अनुभव: कम से कम 2 वर्ष (नौकरीपेशा के लिए)

बिज़नेस कितना पुराना है: कम से कम 3 वर्ष (गैर- नौकरीपेशा के लिए)

न्यूनतम सैलरी: कम से कम 25,000 रुपये प्रति माह (ये हर बैंक/ लोन संस्थानों में अलग- अलग होती है)

लोन राशि: प्रॉपर्टी वैल्यू की 90% तक

इनके अलावा, होम loan की योग्यता शर्तें इस पर भी निर्भर करती हैं कि आप किस प्रकार की property ले रहे और कहाँ खरीद रहे हैं।


होम लोन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़(Documents Required for Home Loan)


नोट:नीचे दी गई लिस्ट सिर्फ सांकेतिक है, बैंक/ लोन संस्थान अतिरिक्त दस्तावेज़ भी मांग सकता है।

पहचान प्रमाण: पैन कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस (किसी एक की फोटोकॉपी)

आयु प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, 10 वीं कक्षा की मार्कशीट, बैंक पासबुक और ड्राइविंग लाइसेंस (किसी एक की कॉपी)

निवास का प्रमाण: बैंक पासबुक, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पासपोर्ट, यूटिलिटी बिल (टेलीफोन बिल, बिजली बिल, पानी का बिल, गैस बिल) और LIC पॉलिसी रिसीट (किसी एक की कॉपी)

आय प्रमाण (नौकरीपेशा के लिए): फॉर्म 16 की कॉपी, हाल ही की सेलरी स्लिप, पिछले 3 वर्षों के आईटी रिटर्न (ITR) और इंवेस्टमेंट प्रूफ (यदि कोई हो)

आय प्रमाण (गैर- नौकरीपेशा के लिए): पिछले 3 वर्षों का इनकम टैक्स रिटर्न, बैलेंस शीट और कंपनी/ फर्म के प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट स्टेटमेंट, बिज़नेस लाइसेंस की जानकारी और बिज़नेस के पते का प्रमाण

प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज़: सोसायटी / बिल्डर से NOC, घर के निर्माण में होने वाले खर्च का विस्तृत अनुमान, रजिस्टर्ड सेल एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लैटर और बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी की कॉपी



होम लोन के टैक्स लाभ( Tax Benefits of Home Loan)

भारत सरकार, होम लोन लेने पर इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत टैक्स बेनिफिट (Tax Benefits of Home Loan) प्रदान करती है। होम लोन पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट से आप हर साल अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं। 


होम लोन टैक्स लाभ 2022  

इनकम टैक्स एक्ट सेक्शनकिस पर होम लोन टैक्स लाभ मिलता है अधिकतम टैक्स छूट राशि 

सेक्शन 24(b) ब्याज भर ने पर ₹2 लाख 

सेक्शन 80C मूल लोन राशि पर (स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी)₹1.5 लाख

सेक्शन 80EEअतिरिक्त ब्याज (पहली बार घर खरीदने वालों के लिए)₹50,000

सेक्शन 80EEAअतिरिक्त ब्याज (किफायती आवास के लिए)₹1.5 लाख




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