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Pushpa movie review hindi | Allu Arjun | Pushpa Movie hindi

 Pushpa movie review (यहां पढ़िए पूरा रिव्यू।)



फिल्म:- पुष्पा (Pushpa)


पुष्पा स्टारकास्ट:- अल्लू अर्जुन (Allu Arjun), रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna), फहाद फासिल (Fahadh Faasil), धनंजय (Dhanunjay), राव रमेश (Rao Ramesh), सुनील (Suneel), अनुसूइया भारद्वाज (Anasuya Bharadwaj), अजय घोष (Ajay Ghosh)


पुष्पा डायरेक्टर:- सुकुमार (Sukumar)


कहां देखें:- सिनेमाघरों में



सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) और रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) स्टारर निर्देशक सुकुमार की फिल्म पुष्पा थियेटर पहुंच चुकी है। इस फिल्म को बॉलीवुड लाइफ की टीम से रसेल डीसल्वा ने रिव्यू किया है। लंबे वक्त से साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के बॉलीवुड डेब्यू पर हर किसी की नजर थी। ये इंतजार पुष्पा के साथ खत्म हुआ है। स्टाइलिश स्टार अल्लू अर्जुन, पुष्पा के साथ अपनी पहली पैन इंडिया रिलीज फिल्म लेकर दर्शकों के बीच पहुंचे हैं। तो कैसी है अल्लू अर्जुन-रश्मिका मंदाना, फहाद फासिल और सुनील की फिल्म पुष्पा, आइए यहां जानते हैं।



फिल्म की कहानी पुष्पा राज की है। जिसका किरदार अल्लू अर्जुन ने निभाया है। पुष्पा राज एक मजदूर है जो अपने मालिकों कोंडा रेड्डी, जली रेड्डी, जक्का रेड्डी, के लिए चंदन की लकड़ियों की अवैध तस्करी करता है। धीरे-धीरे उसका कद बढ़ता जाता है। पुष्पा राज की कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न उस वक्त आता है जब मंगलम श्रीनु (सुनील) और भवंर सिंह शेखावत (फहाद फासिल) जैसी बड़ी ताकतों के साथ उसका सामना होता है

क्या है खास?

फिल्म पुष्पा की कहानी पूरी तरह पुष्पा राज के ईर्द-गिर्द ही घूमती है। पुष्पा राज के किरदार में अल्लू अर्जुन ने खुद को ढाला नहीं है बल्कि इसे जिया है। ऐसा बिल्कुल भी फील नहीं होता कि अल्लू अर्जुन फिल्म में एक्टिंग कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि सालों से पुष्पा राज जंगल में ही रहता आया है। वहीं बड़ा हुआ है। फिल्म में देवी श्री प्रसाद ने शानदार बैकग्राउंड स्कोर दिया है। जो फिल्म में जान फूंकता है। वहीं, सामंथा रुथ प्रभु का गाना उ अंटावा भी थियेटर में लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर देता है।


कहां रह गई कमी?


तमाम अच्छाइयों को बावजूद ‘पुष्पा’ कोई ऐसी फिल्म नहीं है, जिसमें कोई कमी न हो. फिल्म की सबसे ज़्यादा खटकने वाली चीज़ है रश्मिका मंदाना और अल्लू अर्जुन की लव स्टोरी. ये फिल्म का सबसे गैर-ज़रूरी और प्रॉब्लमैटिक हिस्सा है. हम उसके डिटेल्स आपसे शेयर नहीं कर सकते. मगर इस दिक्कत भरी चीज़ को भी फिल्म आखिर में जस्टिफाई कर देती है. जिसका बिल्कुल कोई सेंस नहीं बनता. फहाद फाज़िल ने भंवर सिंह शेखावत नाम के पुलिस ऑफिसर का रोल किया है. वो फिल्म के बिल्कुल आखिरी में हिस्से में आता है. जब दो बड़े स्टार्स स्क्रीन पर एक-दूसरे के सामने आते हैं, तो अलग ही लेवल का एड्रेनलीन रश फील होता है. इसी चीज़ को भुनाने के लिए अल्लू अर्जुन और फहाद फाज़िल के बीच फिल्म के आखिर में कुछ कंफ्रंटेशनल सीन्स डाले गए हैं. मगर ये सीन्स वो प्रभाव पैदा नहीं कर पाते, जिस मक़सद से इन्हें फिल्म में जगह दी गई थी. इससे बेहतर तो यही होता कि फहाद को कायद से फिल्म के दूसरे पार्ट में इंट्रोड्यूस किया जाता. इससे दो चीज़ें होतीं, इस तीन घंटे लंबी फिल्म की लंबाई कम से कम 15-20 मिनट कम हो जाती और फिल्म को एक सैटिस्फाइंग एंडिंग मिल जाती.



‘पुष्पा’ को देखने को ओवरऑल अनुभव ये है कि अगर लंबे समय से कोई मेनस्ट्रीम मसाला फिल्म नहीं देखी, तो इसे देखा जा सकता है. उसके लिए आपको कुछ चीज़ें करनी होंगी. फिल्म-प्लॉट या नैरेटिव में लॉजिक की तलाश नहीं करनी होगी. जो स्क्रीन पर देखा, उसे एंजॉय करिए. थिएटर से निकलते वक्त फिल्म को नहीं, उसे देखने के अनुभव को अपने साथ लेकर घर जाइए.


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