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Cryptocurrency news: टेक्नोलॉजी जारी रखने की होगी इजाजत, क्या है डिजिटल माइनिंग?


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 सरकार ने देश में बिटकॉइन Bitcoin जैसी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसीज private cryptocurrencies को बैन करने का मन बना लिया है। इसके लिए संसद के शीतकालीन सत्र में एक बिल लाया जाएगा। इसमें बिटकॉइन जैसी प्राइवेट डिजिटल करेंसी पर पूरी तरह बैन लगाने का प्रावधान है लेकिन इसकी टेक्नोलॉजी जारी रखने की इजाजत होगी। इससे देश में डिजिटल माइनिंग का रास्ता साफ होगा। आइए जानते हैं क्या है डिजिटल माइनिंग?

Crypto mining kya hota hai 

क्रिप्टो माइनिंग या बिटकॉइन माइनिंग का मतलब पजल्स को सॉल्व करके नई बिटकॉइन बनाना है। साथ ही क्रिप्टो माइनर्स को ब्लॉकचेन नेटवर्क पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन को वेलिडेट करना और इन्हें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में शामिल करना शामिल है। सबसे अहम बात यह है कि क्रिप्टो माइनिंग किसी डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क पर डिजिटल करेंसी की डबल स्पेंडिंग से बचाना है। फिजिकल करेंसीज की तरह जब कोई मेंबर क्रिप्टोकरेंसी खर्च करता है तो डिजिटल लेजर को अपडेट करना होता है। यानी देने वाले के अकाउंट से पैसा कट जाता है और लेने वाले के खाते में आ जाता है।

डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता है। 
यही वजह है कि बिटकॉइन के डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में केवल मान्यता प्राप्त माइनर्स को ही डिजिटल लेजर में ट्रांजैक्शंस अपडेट करने की अनुमति है। इस तरह यह सुनिश्चित करना माइनर्स का काम है कि नेटवर्क पर डबल स्पेंडिंग न हो।


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नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए माइनर्स को इनाम के तौर पर नए कॉइन दिए जाते हैं। चूंकि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर्स में कोई केंद्रीय अथॉरिटी नहीं है, इसलिए ट्रांजैक्शंस को वैलिडेट करने के लिए माइनिंग प्रोसेस बहुत अहम है। केवल मान्यता प्राप्त माइनर्स को ही डिजिटल लेजर में ट्रांजैक्शंस अपडेट करने की इजाजत है। इसके लिए प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) consensus protocol बनाया गया है। PoW नेटवर्क को बाहरी हमलों से भी बचाता है।

क्रिप्टो माइनिंग कौन कर सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग के लिए ऐसे कम्प्यूटर चाहिए जिनमें जटिल क्रिप्टोग्राफिक मैथमेटिक इक्वेशंस को सॉल्व करने के लिए स्पेशल सॉफ्टवेयर हो। बिटकॉइन के शुरुआती दिनों में इसे होम कम्प्यूटर से एक सिंपल सीपीयू चिप से माइन किया जा सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। आज इसके लिए स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इसे चौबीसों घंटे भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन के साथ जोड़े रखना पड़ता है। हर क्रिप्टो माइनर के लिए ऑनलाइन माइनिंग पूल का मेंबर होना जरूरी है।


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