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Cryptocurrency Ban: आपकी क्रिप्टोकरंसी का क्या होगा?





मेरा सुझाव यह है:-

A. सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरंसीज पर बैन (Ban on Private cryptocurrencies) लगाने की जो Glossary इस्तेमाल की गई है, उसका मतलब यह है कि बिटकॉइन(Bitcoins) सहित वे सभी क्रिप्टो इसके दायरे में आएंगी, जिन्हें किसी सरकार ने जारी नहीं किया है।

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B. प्राइवेट क्रिप्टो पर बैन का मतलब यह है कि भारत में इन क्रिप्टो टोकंस (Crypto Tokens)में खरीद-फरोख्त की इजाजत नहीं होगी।

C. अभी लोगों के पास जो होल्डिंग है, जहां तक उसका सवाल है तो इससे पहले 2019 में प्रस्तावित बिल में कहा गया था कि लोगों के पास पहले से जो क्रिप्टोकरंसी हैं, उनके बारे में सरकार बताएगी कि उन्हें कहां भेजना है और कैसे डिस्पोज करना है। यह बात बिल के अंदर नहीं थी, लेकिन कहा गया था कि इसकी जानकारी दी जाएगी।

संभावित बैन अगर लग गया तो इंटरनैशनल एक्सचेंज पर ट्रेड कर सकते हैं या नहीं?

A.  इसे इस तरह देखें कि यह बिल कहां पर ट्रेड कर रहे हैं, उसके बारे में नहीं है। कौन कर रहा है, उसके बारे में है। अगर आप इंडियन सिटिजन हैं, इंडियन रेजिडेंट हैं तो बैन लग जाने पर आप ट्रेड नहीं कर पाएंगे, न तो भारत में और न ही बाहर। यह बात 2019 के मसौदे में साफ की गई थी।

होल्डिंग के डिस्पोजल का मसला इस तरह समझें कि एक वक्त गोल्ड के बारे में भी कहा गया था कि एक तय मात्रा से ज्यादा सोना आप नहीं रख सकते अपने पास। लेकिन क्रिप्टो एक डिजिटल एसेट है। इसे किसी से कैसे लिया जाएगा, यह समझना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है।

जहां तक फॉरेन एसेट के रूप में क्रिप्टो को अपने पास रखने का सवाल है तो बैन लग जाने पर जो रेजिडेंट इंडियन हैं, वे तो नहीं रख पाएंगे। अगर आप किसी देश में घूमने गए हैं तो भारत में बैन की गई किसी चीज को वहां खरीदकर वहीं पर कंज्यूम तो कर ही सकते हैं, लेकिन उसे भारत नहीं ला सकते। तो इस तरह देखें तो ऐसा लग रहा है कि क्रिप्टो को भी फॉरेन एसेट के रूप में होल्ड करने की इजाजत नहीं होगी।

जहां तक क्रिप्टो बिल (Crypto Bill) में कुछ छूट देने की बात है तो इसका मतलब यह लग रहा है कि अगर कोई कंपनी क्रिप्टो टेक्नॉलजी से जुड़ा सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट कर रही है तो उसे नहीं रोका जाएगा।

 ज्यादातर देशों में क्रिप्टो से तीन तरह की परेशानी होने की बात सामने आई है। एक तो टैक्स चोरी का डर है। दूसरा यह कि लोग पैसे लेकर देश से निकल जाएं तो पता भी नहीं चलेगा। और तीसरा यह कि अवैध गतिविधियों में इसका इस्तेमाल हो सकता है। यहां भारत में हाल में मार्केटिंग और ऐडवर्टाइजिंग को लेकर सवाल उठे हैं तो कुछ हद तक यह बात भी सही दिख रही है। उम्मीद है कि प्रस्तावित बिल में ग्राहकों की सुरक्षा पर ज्यादा जोर होगा।

लोगों को घबराहट में नहीं फंसना चाहिए। बजट सेशन वाले बिल के एजेंडा में भी ठीक यही बात थी, जो इस बार कही गई है। इस बीच, लेकिन सरकारी स्तर पर काफी चर्चा हुई है। तो एजेंडा भले ही एक जैसा हो, यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि विधेयक की बातें भी एकसमान होंगी। लिहाजा घबराहट में कोई कदम उठाने से पहले तस्वीर साफ होने का इंतजार कर लेना बेहतर होगा।


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